Thursday 18-06-2026

नर्मदापुरम। महिला को अश्लील मैसेज भेजने से जुड़े अपराध में गिरफ्तार नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी सुनील सिंह राजपूत को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। सत्र न्यायाधीश तृप्ति शर्मा ने आरोपी की जमानत आवेदन को निरस्त कर दिया। न्यायालय द्वारा जमानत आवेदन खारिज किए जाने के बाद अब आरोपी के पास उच्च न्यायालय में जमानत याचिका प्रस्तुत करने का विकल्प शेष है।
गौरतलब है कि कोतवाली थाना नर्मदापुरम में दर्ज प्रकरण के आधार पर पुलिस ने सुनील राजपूत को गिरफ्तार कर 12 जून को न्यायालय में पेश किया था, जहां से आरोपी को जेल भेजने के आदेश दिए थे। इसके बाद आरोपी की ओर से जिला न्यायालय में जमानत आवेदन प्रस्तुत किया था।
मंगलवार 16 जून को सत्र न्यायाधीश तृप्ति शर्मा ने जमानत प्रकरण क्रमांक BA/181/2026 पर सुनवाई करते हुए आरोपी की जमानत निरस्त कर दी। न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत जमानत आवेदन में आरोपी की ओर से यह उल्लेख किया गया था कि उसके विरुद्ध पूर्व में कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं है। हालांकि पुलिस डायरी में आरोपी के खिलाफ पूर्व से दो अन्य मामले दर्ज होना बताया गया।
न्यायालय के समक्ष यह तथ्य भी सामने आया कि इसी प्रकार के एक अन्य मामले में आरोपी सुनील राजपूत के विरुद्ध देहात थाना नर्मदापुरम में भी प्रकरण दर्ज है, जो वर्तमान में न्यायालय में लंबित है। न्यायालय ने अपने आदेश में इस तथ्य को महत्वपूर्ण माना कि आरोपी के विरुद्ध समान प्रकृति के अपराधों के आरोप पूर्व में भी दर्ज हैं। जमानत निरस्त करने संबंधी आदेश में न्यायालय ने प्रथम दृष्टया यह भी माना कि आरोपी इस प्रकार के अपराध करने का आदतन प्रतीत होता है। आदेश में यह उल्लेख किया गया है कि आरोपी द्वारा पीड़िता के साथ समझौता कर साक्ष्यों को प्रभावित करने का प्रयास किया जाना प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है। न्यायालय ने इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को जमानत दिए जाने योग्य नहीं माना और आवेदन खारिज कर दिया।
जमानत याचिका निरस्त होने के बाद अब सुनील राजपूत को जेल में ही रहना होगा। विधिक जानकारों के अनुसार जिला न्यायालय से राहत नहीं मिलने की स्थिति में आरोपी उच्च न्यायालय की शरण ले सकता है और वहां जमानत के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।
इधर आरोपी की गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के बाद नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) द्वारा सुनील राजपूत को नौकरी से ना निकालकर सिर्फ अतिक्रमण दल के प्रभार से हटाया है। जबकि गंभीर अपराधिक प्रकरण के चलते जेल भेजे जाने के बाद नैतिक और शासन हित सीएमओ को ऐसे कर्मचारी को हटा देना चाहिए। उक्त आरोपी के विरुद्ध स्वयं नगर पालिका ने पूर्व में अपराधिक मामला दर्ज कराकर नौकरी से हटा दिया था और उच्च न्यायालय जबलपुर ने याचिका के पारित आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया था कि सुनील राजपूत को नौकरी पर रखने संबंधित कोई राहत नहीं दी जा सकती।
इस मामले में नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम के पूर्व कार्यपालन यंत्री आरसी शुक्ला ने बताया कि आरोपी सुनील राजपूत को जेल भेजे जाने के बाद नौकरी से निकालने का आदेश नगर पालिका को करना चाहिए।

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