Tuesday 07-07-2026

नर्मदापुरम। महिला को अश्लील मैसेज भेजने के मामले में जेल में बंद नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी सुनील राजपूत को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर से भी राहत नहीं मिल सकी। जिला न्यायालय से जमानत आवेदन निरस्त होने के बाद आरोपी की ओर से उच्च न्यायालय जबलपुर में दायर जमानत याचिका को सुनवाई के दौरान वापिस ले लिया गया, जिसके बाद न्यायालय ने याचिका खारिज के आदेश पारित कर दिए।
जिला न्यायालय से जमानत नहीं मिलने के बाद 18 जून 2026 को आरोपी सुनील राजपूत की ओर से हाई कोर्ट में जमानत याचिका पेश की गई थी। प्रस्तुत प्रकरण नंबर MCRC 28612/2026 की सुनवाई न्यायमूर्ति रामकुमार चौबे की कोर्ट में 6 जुलाई 2026 को हुई। सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता ने न्यायालय से जमानत याचिका वापिस लेने की अनुमति मांगी। अधिवक्ता ने निवेदन किया कि चार्जशीट प्रस्तुत होने के बाद जमानत याचिका दायर करने की स्वतंत्रता प्रदान की जाए। इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने याचिका को वापस लिया हुआ मानकर 6 जुलाई 2026 को उसे खारिज कर दिया।
जिला न्यायालय पहले ही कर चुका था जमानत निरस्त
उल्लेखनीय है कि महिला को अश्लील मैसेज भेजने के मामले में सुनील राजपूत के विरुद्ध कोतवाली थाना नर्मदापुरम में दर्ज प्रकरण के आधार पर पुलिस ने गिरफ्तार कर 12 जून 2026 को न्यायालय में पेश किया था, जहां से उसे जेल भेज दिया था। इसके बाद आरोपी की ओर से जिला न्यायालय में जमानत आवेदन प्रस्तुत किया गया था। 16 जून 2026 को तृप्ति शर्मा ने जमानत प्रकरण क्रमांक BA/181/2026 पर सुनवाई करते हुए आवेदन निरस्त कर दिया। जिला न्यायालय ने अपने आदेश में प्रथम दृष्टया माना था कि आरोपी के विरुद्ध पूर्व में भी इसी प्रकार का एक मामला दर्ज है, जो न्यायालय में विचाराधीन है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि आरोपी द्वारा पीड़िता से समझौता कर साक्ष्यों को प्रभावित करने का प्रयास प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है। इन परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने आरोपी को जमानत देने से इंकार कर दिया था।
नगर पालिका ने कार्य से हटाने के नहीं किए आदेश
नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी सुनील राजपूत 12 जून 2026 से जेल में बंद है। गिरफ्तारी के बाद तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी हेमेश्वरी पटले ने सुनील राजपूत को सेवा से हटाए जाने के आदेश जारी ना करते हुए केवल अतिक्रमण दल के प्रभारी पद से हटाने के आदेश जारी किए। आरोपी के विरुद्ध अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत नहीं दी जा रही है लेकिन नगर पालिका उक्त दिहाड़ी मजदूर को हटाने के आदेश जारी नही कर रही हैं। इस मामले में एक्सपर्ट की माने तो दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के विरुद्ध आपराधिक मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा जाता है, तो ऐसे कर्मचारी को हटाए जाने के आदेश जारी करना चाहिए।
पारित आदेश की डाउनलोड प्रति

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