Friday 22-05-2026

नर्मदापुरम। एक ओर शासन द्वारा “नशामुक्त भारत अभियान” के तहत गांव-गांव जनजागरूकता फैलाने के लिए मास्टर वॉलंटियर्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में ही खुलेआम गुटखा, तंबाकू और सिगरेट की बिक्री प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। गुरुवार 21 मई 2026 को कलेक्ट्रेट स्थित जिला पंचायत सभागृह में नशामुक्त भारत अभियान अंतर्गत जिला स्तरीय मास्टर वॉलंटियर्स का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, लेकिन इसी परिसर के चंद कदमों पर कलेक्ट्रेट परिसर में धूम्रपान से संबंधित सामग्री की बिक्री होती रही।
जिला पंचायत सभागृह में नशामुक्त भारत अभियान कार्यक्रम आयोजित
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जिला पंचायत सभागृह नर्मदापुरम में एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन मध्यप्रदेश जल एवं भूमि प्रबंध संस्थान (वाल्मी) हिल्स भोपाल के माध्यम से किया गया। प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे मास्टर वॉलंटियर्स को नशामुक्ति जनजागरूकता अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में वाल्मी भोपाल के स्टेट ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर डॉ. अतुल रायजादा मुख्य प्रशिक्षक के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने नशे के दुष्प्रभाव, युवाओं पर पड़ रहे मानसिक और सामाजिक असर तथा समाज में जागरूकता फैलाने की रणनीतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने मास्टर वॉलंटियर्स से अपील की कि वे गांव-गांव जाकर लोगों को नशे से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करें और युवाओं को इस बुराई से दूर रहने के लिए प्रेरित करें। प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित प्रतिभागियों को नशामुक्ति की शपथ भी दिलाई गई।
कार्यक्रम में डिप्टी कलेक्टर एवं सामाजिक न्याय विभाग की उपसंचालक डॉ. बबीता राठौर ने मास्टर वॉलटियर्स से अपील करते हुए कहा कि समाज में नशे से पीड़ित व्यक्तियों को चिन्हित कर उन्हें इस बुराई से बाहर निकलने में सहयोग करे तथा जनजागरूकता अभियान को गांव गांव तक पहुंचाएं।
लेकिन जहां एक ओर कलेक्ट्रेट परिसर में नशामुक्ति अभियान का प्रशिक्षण आयोजित किया गया वही कलेक्ट्रेट परिसर में ही कैंटीन के बाजू में गुटखा, तंबाकू और सिगरेट की दुकान खुली रही। शहर में भी स्कूल, पार्क के पास सहित सार्वजनिक स्थानों पर गुटखा तंबाकू की दुकानें धड़ल्ले से चल रही है। प्रशासन नशा मुक्ति जागरूकता अभियान तो चला रहा है लेकिन दुकानों पर लगाम लगाने में असमर्थ दिख रहा है।प्रशासन को नशामुक्त समाज का संदेश की शुरुआत सबसे पहले अपने सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक परिसरों से करना चाहिए। कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र में तंबाकू उत्पादों की बिक्री होना अभियान की मंशा पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। एक तरफ प्रशासन गांवों में नशामुक्ति के लिए जनजागरूकता अभियान चला रहा है, वहीं दूसरी तरफ जिला मुख्यालय परिसर में ही नियमों का पालन नहीं हो रहा। ऐसे में अभियान की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

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