Monday 27-04-2026

पुष्पा संतराम निषरेले का नर्मदापुरम में पक्का मकान, इंदौर में नियम विरूद्ध पीएम आवास योजना में लिया फ्लैट

Posted By Vinod Kewat
  • Updated Monday Apr 27 2026
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पुष्पा संतराम निषरेले का नर्मदापुरम में पक्का मकान, इंदौर में नियम विरूद्ध पीएम आवास योजना में लिया फ्लैट style="text-align: Justify; line-height: 1.5;"

मध्य प्रदेश। प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य जरूरतमंद और बेघर लोगों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है, लेकिन मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में सामने आए एक मामले ने इस योजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक दंपति ने स्वयं का दो मंजिला पक्का मकान होने के बावजूद झूठी जानकारी देकर योजना के तहत पीएम आवास योजनांतर्गत फ्लैट हासिल कर लिया, जिसमें 3 लाख रुपए का अनुदान मिला है।

झूठी जानकारी से दंपत्ति ने लिया पीएम आवास योजना का लाभ

नर्मदापुरम शहर के निवासी पुष्पा निषरेले और संतराम निषरेले ने प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गंत फ्लैट लेने के लिए खुद को इंदौर के राम रहीम कॉलोनी निवासी बताया है। दंपति के पास नर्मदापुरम शहर के शासकीय आईटीआई रोड स्थित निर्मल होम्स कॉलोनी में पूर्व से ही दो मंजिला पक्का मकान मौजूद है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत वही हितग्राही पात्र होते है जिनके परिवार के पास पहले से शहरी क्षेत्र में पक्का मकान नहीं हो। स्वयं का दो मंजिला पक्का मकान होने के बावजूद दंपति ने कथित रूप से गलत जानकारी देकर आवेदन किया और पीएम आवास योजनांतर्गत इंदौर में नियम विरूद्ध 1 बीएचके फ्लैट हासिल कर 3 लाख रूपए की अनुदान राशि का लाभ लिया है।

पलाश परिसर - 1 के ब्लॉक ए-12 में फ्लैट हुआ आवंटित

प्राप्त फ्लैट की रजिस्ट्री के अनुसार, इंदौर के नगर परिषद राऊ क्षेत्र में स्थित पलाश परिसर-1 में दंपत्ति के नाम पर फ्लैट आवंटन हुआ है। ब्लॉक ए-12 की सातवीं मंजिल पर स्थित फ्लैट नंबर 708, जिसका क्षेत्रफल लगभग 376.38 वर्गफीट है, दंपति को दिया गया है। कलेक्टर द्वारा अनुमोदित हितग्राहियों की सूची में दंपति का नाम 26 नंबर पर दर्ज है। दंपत्ति के द्वारा किए गए आवेदन के आधार पर आवंटन पत्र क्रमांक 1472/ पीएमएवाई/पलाश-1 परिसर/2022-23 दिनांक 08 फरवरी 2023 को जारी हुआ है।

आवास योजना में 3 लाख रूपए का मिला अनुदान

इंदौर जिले के राऊ नगर परिषद क्षेत्र में निर्मित पलाश परिसर-1 में दंपति को 1 बीएचके फ्लैट आवंटित हुआ, जिसमें योजना के तहत कुल 3 लाख रूपए का अनुदान मिला है। इसमें केंद्र सरकार द्वारा 1 लाख 50 हजार रूपए और राज्य सरकार द्वारा 1 लाख  50 हजार रूपए की राशि शामिल है। फ्लैट की वास्तविक कीमत लगभग 11 लाख 50 हजार रूपए थी, लेकिन अनुदान मिलने के बाद फ्लैट 8 लाख 50 हजार रूपए में दंपत्ति को मिला है।

आवंटित फ्लैट की रजिस्ट्री में कार्रवाई का है उल्लेख

फ्लैट की रजिस्ट्री नगर पालिका निगम इंदौर के सहायक आयुक्त गोविंद सिंह कौशल ने पुष्पा और संतराम निषरेले (पति-पत्नी) के नाम पर की है। रजिस्ट्री दस्तावेज में स्पष्ट उल्लेख है कि आवासहीन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग श्रेणी के पात्र होने के आधार पर आवास की समस्या को हल करने हेतु रियायती दरों पर स्वयं के आवास हेतु आवंटित किया गया है। साथ ही रजिस्ट्री में उल्लेख है कि यदि क्रेता द्वारा असत्य दस्तावेज या झूठी जानकारी देकर फ्लैट प्राप्त किया गया है, तो संबंधित पक्ष के खिलाफ वैधानिक न्यायालयीन कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, ऐसी स्थिति में होने वाले सभी खर्चों की जिम्मेदारी भी क्रेता की होगी। 


आर्थिक रूप से कमजोर में पात्र हितग्राही बताया

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पति-पत्नी, अविवाहित बेटा और अविवाहित बेटी को एक ही परिवार माना जाता है। यदि इस परिवार के पास भारत के किसी भी शहरी क्षेत्र में पक्का मकान है, तो उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल सकता। उक्त दंपत्ति को आवंटित आवास की रजिस्ट्री में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग श्रेणी के पात्र हितग्राही को आवंटन दर्शाया गया है। लेकिन दंपति के पास नर्मदापुरम में शासकीय आई टी आई रोड स्थित निर्मल होम्स कॉलोनी में स्वयं का दो मंजिला पक्का मकान, चार पहिया वाहन, आरसीसी मॉल में स्वयं की पक्की दुकान सहित अन्य कॉलोनियों में प्लॉट होने के बावजूद जानकारी छुपाकर योजना का लाभ लिया है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

वास्तविक हितग्राहियों के साथ अन्याय

ऐसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि जहां एक ओर आम लोग वर्षों तक आवास योजना का लाभ पाने के लिए इंतजार करते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आसानी से लाभ उठा लेते हैं। इससे वास्तविक जरूरतमंदों के अधिकारों का हनन होता है और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

जांच के बाद हो सकती है दंपत्ति के विरूद्ध कार्रवाई

इस मामले में प्रशासनिक जांच की पूरी संभावना है। साथ ही प्राथमिक जांच में तथ्य सही पाए जाते हैं, तो संबंधित दंपति के खिलाफ निम्न कानूनी कार्रवाई हो सकती है :

  1. दंपत्ति द्वारा दिए शपथ पत्र और गलत दस्तावेज की जांच हो सकती है और उनके विरुद्ध मामला दर्ज हो सकता है
  2. अनुदान राशि के 3 लाख रुपए की  वसूली की जा सकती है
  3. पीएम आवास योजना में आवंटित फ्लैट को निरस्त हो सकता है


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