Thursday 17-09-2026

नर्मदापुरम क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में लंबे समय से पदस्थ सुनील मुदगल उर्फ पप्पन का ट्रांसफर की जानकारी को आरटीओ छुपाने पर लगे हुए है। सुनील मुदगल उर्फ पप्पन का नर्मदापुरम से ट्रांसफर हो चुका है जिनको - आरटीओ ने भारमुक्त नहीं किया है जिसके चलते वे नर्मदापुरम कार्यालय में जमे हुए है। सुनील उर्फ पप्पन के ट्रांसफर और उनको किए जा रहे भुगतान की जानकारी भी आरटीओ सूचना के अधिकार में देना नहीं चाहते है। मामले में एडीएम नर्मदापुरम ने 13 अगस्त 2026 को सूचना के अधिकार की प्रथम अपील में सुनवाई की और जानकारी 15 दिन में उपलब्ध कराने के आदेश दिए । एक महीना बीत जाने के बाद भी जानकारी आवेदक को नहीं दी गई। उक्त आदेश आरटीओ प्रमोद कापसे को उनके व्हाट्सएप नंबर पर भेजकर जानकारी मांगी गई, तो उन्होने आवेदक को सीधा जबाव दिया कि उन्हें पत्र - अभी प्राप्त नहीं हुआ है। पत्र आएगा तो जबाव भेज दूंगा। जिससे साफ स्पष्ट हो रहा है कि सुनील मुद्ग़ल उर्फ पप्पन के ट्रांसफर की जानकारी देना नहीं चाहते है।
15 दिन में जानकारी देने के हुए है आदेश
आवेदक ने नर्मदापुरम क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में पदस्थ सुनील मुदगल उर्फ पप्पन के ट्रांसफर और उन्हें विभाग से किए जा रहे भुगतान से संबंधित जानकारी सूचना के अधिकार (आरटीआई) में मांगी थी। आरटीओ कार्यालय से जानकारी नहीं मिलने पर आवेदक ने कलेक्टर नर्मदापुरम को प्रथम अपील पेश की। जिस पर एडीएम नर्मदापुरम ने सुनवाई करते हुए 13 अगस्त 2026 को आदेश जारी किया कि आवेदक द्वारा चाही गई जानकारी का अवलोकन कराकर 15 दिवस में पंजीकृत डाक के माध्यम से निःशुल्क जानकारी उपलब्ध कराई जाए। आदेश के एक महीना बीत जाने के बाद भी आरटीओ ने ना तो जानकारी का अवलोकन कराया और ना ही जानकारी उपलब्ध कराई।
33 वर्षों से आरटीओ नर्मदापुरम कार्यालय में जमे
सूत्रों की माने तो ट्रांसफर आदेश की जानकारी मिलने से वर्तमान पदस्थापना की स्थिति सामने आ सकती है इसलिए जानकारी नहीं दी जा रही है। सुनील मुदगल उर्फ पप्पन का 33 वर्षों के लंबे कार्यकाल में केवल एक बार ही ट्रांसफर हुआ है और वहां से छः महीने बाद वे दोबारा नर्मदापुरम कार्यालय में पदस्थ हो गए। लंबे समय तक एक ही कार्यालय में पदस्थ रहने से विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे है। वहीं सुनील मुदगल ने अपने रिश्तेदार सुनील शर्मा को दैनिक वेतन कर्मचारी में सफाई कर्मी के रूप में कार्यालय में लगवाया है। सुनील मुदगल के ट्रांसफर, भारमुक्ति, भुगतान और रिश्तेदार को कार्यालय में लगवाने से संबंधित जानकारी मिलने से मामले का खुलासा हो सकता है लेकिन पप्पन की प्रशासनिक अधिकारियों से तालमेल के चलते उनको रिलीव नहीं किया जा रहा और आरटीओ जानकारी ना देकर मामले को दबाने का प्रयास कर रहे है।

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