नर्मदापुरम। सूचना के अधिकार अधिनियम को मध्य प्रदेश में लागू हुए 19 वर्ष हो चुके है लेकिन अधिनियम का ज्ञान अभी तक लोक सूचना अधिकारियों को नहीं है। या कहा जा सकता है कि आवेदकों को परेशान करने अथवा जानकारी छुपाने के लिए लोक सूचना अधिकारी अधिनियम की धाराओं का गलत और अपनी मंशानुरूप उल्लेख कर जानकारी नही देना चाहते है। ऐसा ही एक मामला नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम का है, जहां अधिनियम की धाराओं का अपने हिसाब से उल्लेख कर आवेदकों को जानकारी प्रदान नहीं की जा रही है साथ ही आवेदकों के आवेदन तक लौटाएं जा रहे है। श्रीमती हेमेश्वरी पटले लोक सूचना अधिकारी एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम ने मध्य प्रदेश शासन की बिना किसी अधिसूचना जारी हुए आरटीआई आवेदन की ऑफलाईन प्रक्रिया को मानों पूर्णत: बंद कर दिया है। ऐसा हम इसलिए कह रहे है कि आवेदकों द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(1) के तहत भारतीय रजिस्टर्ड डाक से प्रेषित आवेदन ऑनलाईन आवेदन करें की टीप के साथ वापिस लौटा दिया गया। जबकि शासन एवं वरिष्ठ कार्यालय के द्वारा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किए गए है। मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग में भी ऑफलाईन आवेदन लेने से मना नहीं किया जा रहा है, लेकिन नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम कार्यालय द्वारा ऑफलाईन आवेदन लेने से इंकार किया जा रहा है। लेकिन शासन के द्वारा कार्यालय को ई ऑफिस करने की प्रक्रिया में आरटीआई आवेदको खासा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोक सूचना अधिकारी द्वारा आरटीआई आवेदन पर किए गए पत्राचार को भी लौटाया जा रहा है। आवेदकों को जानकारी प्रदान नहीं करने के लिए लोक सूचना अधिकारी श्रीमती पटले द्वारा नियम विरूद्ध जानकारी प्राप्त करने का उद्देश्य तक पूछा जा रहा है साथ ही जानकारी मांगने पर वैधानिक कार्यवाही की लिखित धमकी तक दी जा रही है। जबकि व्यक्तिगत जानकारी मांगने पर आवेदक का आवेदन निरस्त किया जा सकता है। आवेदक के विरूद्ध राज्य सूचना आयोग तक अधिनियम में शक्ति प्रदान नहीं की गई है, बावजूद श्रीमती पटले द्वारा आवेदकों को वैधानिक कार्यवाही की लिखित धमकी तक दी जा चुकी है। नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम कार्यालय की अधिकतर जानकारी को नियम विरूद्ध अधिनियम की धारा 8 का उल्लेख कर निरस्त किया जा रहा है। आवेदकों को उनकी ही संपत्ति निजी जानकारी बताकर प्रदान नहीं की जा रही है। नर्मदापुरम के रसूलिया निवासी सूरज प्रकाश अग्रवाल अधिवक्ता को उनकी मां के नाम दर्ज नल कनेक्शन की जानकारी ही प्रदान नहीं कर उक्त जानकारी तृतीय पक्ष होना बताकर उनकी स्वर्गीय मां को पत्र प्रेषित कर सहमति चाही गई है। अधिनियम की धारा 2 में उल्लेख है कि कौन सी जानकारी आरटीआई में आवेदकों को प्रदान की जा सकती है। वहीं लोक सूचना अधिकारी नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम द्वारा आयोग के पारित आदेश को भी नजरअंदाज कर जानकारी प्रदान नहीं किया जाना भी अधिनियम की धज्जियां उड़ाना प्रतीत होता है, जहां आयोग ने पारित आदेश में उल्लेख किया है कि आवेदक द्वारा चाही गई जानकारी रजिस्टर्ड डाक से प्रदान की जावे लेकिन लोक सूचना अधिकारी अपनी जिद्द पर अड़ी हुई है कि आवेदक कार्यालय में उपस्थित होकर जानकारी प्राप्त करें।
नियम विरूद्ध लौटाएं गए आरटीआई आवेदन
आवेदकों के द्वारा कार्यालय में उपस्थित होकर आरटीआई आवेदन दिए जाने पर उनसे आवेदन नहीं लिए जा रहे है और सिर्फ ऑनलाईन आवेदन को ही मान्य किए जाने की बात कही जा रही है। इसी प्रकार आवेदकों द्वारा भारतीय रजिस्टर्ड डाक से प्रेषित आवेदन भी पोस्टमैन से नहीं ली जा रही है जो कि आवेदकों को ऑनलाईन आवेदन करें की टीप के साथ लौटाएं जा रहे है। ऐसे में कुछ आवेदकों को ऑनलाईन प्रक्रिया का ज्ञान नहीं होने से समस्या आ रही है। जो कि नियम विरूद्ध है अधिनियम की धारा 6 में स्पष्ट उल्लेख है कि आवेदकों के द्वारा आवेदन लिखित में या इलेक्ट्रॉनिक हिन्दी अथवा अंग्रेजी भाषा या उस क्षेत्र की शासकीय भाषा में आवेदन किए जा सकते है।
यह कहती है सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 6 (1)
सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(1) में स्पष्ट उल्लेख है कि कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन कोई सूचना अभिप्राप्त करना चाहता है, लिखित में या इलैक्ट्रॉनिक माध्यम से अंग्रेजी या हिन्दी में या उस क्षेत्र की शासकीय भाषा में, जिसमें आवेदन कर सकता है। वहीं अधिनियम में आवेदक के द्वारा चाही गई जानकारी मांगने पर मौखिक रूप से अनुरोध करने वाले उस व्यक्ति को सभी युक्तियुक्त सहायता लिखित में लेखबद्ध करने के लिए अधिनियम में प्रावधान है।
यह कहती है सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 6 (2)
सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(2) में उल्लेख है कि सूचना के लिए प्रार्थना करते हुए आवेदन पत्र में, सूचना की प्रार्थना करने के लिए कोई कारण बताने की आवश्यकता नहीं होगी या उसमें कोई अन्य व्यैक्तिक विवरणों को देने की आवश्यकता नहीं होगी, सिवाय उनके जो उससे संपर्क करने के लिए आवश्यक हो। बावजूद लोक सूचना अधिकारी द्वारा आवेदक विनोद केवट को पत्र क्रमांक 4959 दिनांक 17/07/2025 एवं 4960 दिनांक 17/07/2025 प्रेषित कर नियम विरूद्ध जानकारी का प्रयोजन पूछा गया है।
इनका कहना
ऑफलाईन आवेदन नहीं लिए जा रहे है। अधिसूचना व आदेश प्राप्त नहीं हुए है, पूरा सिस्टम ही ऑनलाईन हो रहा है। अब पूरा कार्यालय ही ई ऑफिस हो रहा है। शासन के आदेश प्राप्त हो रहे है कि सभी कार्य ऑनलाईन किए जाएं।
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