
बैतूल। बैतूल जिले में कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जिला मजिस्ट्रेट श्री नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी द्वारा भारतीय नागरिक संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागूं हैं।
जारी आदेश के अनुसार
कोई भी व्यक्ति, समूह या संस्था सार्वजनिक स्थानों पर धारदार या अन्य हथियार, आग्नेय अस्त्र-शस्त्र, हॉकी, डण्डा, रॉड आदि लेकर नहीं चलेगा तथा न ही उनका प्रदर्शन या दुरुपयोग करेगा।
किसी भी प्रकार की सभा, धरना, प्रदर्शन, जुलूस, रैली या सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन बिना अनुमति नहीं किया जा सकेगा।
सोशल मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों के माध्यम से विधि-विरुद्ध संदेश, चित्र, टिप्पणी, पोस्टर या धार्मिक/साम्प्रदायिक भावनाएं भड़काने वाली सामग्री साझा करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
किसी भी व्यक्ति या समूह को एसिड, पेट्रोल, कैरोसिन जैसे ज्वलनशील पदार्थ लेकर चलने या उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी।
धरना, जुलूस, रैली आदि में पटाखों या विस्फोटक सामग्री के उपयोग पर पूर्णतः रोक रहेगी।
टैंट या पंडाल का निर्माण किसी भी सार्वजनिक स्थान पर बिना अनुमति नहीं किया जाएगा।
किसी भी सड़क, मार्ग, हाईवे या रास्ते पर यातायात में व्यवधान उत्पन्न करने या लोगों की आवाजाही रोकने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
कोई भी व्यक्ति या ग्रुप एडमिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक, ई-मेल आदि पर आपत्तिजनक, भड़काऊ या अफवाह फैलाने वाले संदेश/चित्र/पोस्ट साझा नहीं करेगा।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन प्रतिबंधों के उल्लंघन पर भारतीय नागरिक संहिता के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर सूर्यवंशी की तत्परता और सूझबूझ ने दंगे की आग को शांति में बदला
उल्लेखनीय है कि मुलताई में घटित घटनाक्रम ने पूरे जिले को प्रभावित किया, लेकिन इस संकट की घड़ी में जिला प्रशासन के मुखिया कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने साहस, सूझबूझ और तत्परता का परिचय दिया। जैसे ही उन्हें दो पक्षों के बीच बढ़ते विवाद की सूचना मिली, वे बिना किसी विलंब के पुलिस अधीक्षक श्री जैन से स्वयं मौके पर पहुंचे और स्थिति को अपने नियंत्रण में लिया। उस समय वातावरण तनावपूर्ण था, भीड़ आक्रोशित थी, परंतु कलेक्टर सूर्यवंशी ने शांतचित्त रहते हुए कठोर किंतु न्यायपूर्ण रवैया अपनाया। पुलिस अधीक्षक श्री जैन ने भी मोर्चा संभाला । कलेक्टर ने निर्भीकता से भीड़ के बीच जाकर सभी को कानून की शक्ति और प्रशासन की नीयत से अवगत कराया। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कोई भी बात या सुझाव आंदोलन के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। कानून के दायरे में रहकर ही हर समस्या का समाधान होगा। उनकी इस दृढ़ता और सुझबुझ ने दोनों पक्षों को शांत किया। जो लोग पहले उग्र थे, वही कुछ क्षणों बाद कलेक्टर और एसपी के नेतृत्व में शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोगी बन गए और अपने लोगों को समझने लगे। कलेक्टर और एसपी ने भीड़ भरे स्थानों पर जाकर व्यक्तिगत रूप से लोगों से अपील की, उन्हें तितर-बितर होकर घर जाने की समझाइश दी। उनके इस मानवीय व्यवहार और सख्त प्रशासनिक दृष्टिकोण ने जनता को प्रभावित किया।मुलताई के नागरिकों ने कलेक्टर श्री सूर्यवंशी के साहस और नेतृत्व की सराहना की। उल्लेखनीय है कि यह कोई पहला अवसर नहीं है जब कलेक्टर सूर्यवंशी ने संकट की स्थिति में ऐसा नेतृत्व दिखाया हो। पूर्व में भी उन्होंने अपनी प्रशासनिक सेवाओं में अपनी कुशल नेतृत्व शैली का परिचय दे चुके हैं।

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