Sunday 26-04-2026

इंदौर। प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य जरूरतमंद और बेघर लोगों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है, लेकिन इंदौर में सामने आए एक मामले ने इस योजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक दंपति ने स्वयं का दो मंजिला पक्का मकान होने के बावजूद झूठी जानकारी देकर योजना के तहत 1BHK फ्लैट हासिल कर लिया, जिसमें 3 लाख रुपए का अनुदान लिया है।
झूठी जानकारी से लिया योजना का लाभ
नर्मदापुरम शहर के निर्मल होम्स कॉलोनी निवासी पुष्पा निषरेले और संतराम निषरेले ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इंदौर में फ्लैट पाने के लिए खुद को राम रहीम कॉलोनी, इंदौर का निवासी बताया है। दंपति के पास पहले से नर्मदापुरम की निर्मल होम्स कॉलोनी में दो मंजिला पक्का मकान मौजूद है। योजना के नियमों के अनुसार, यदि किसी परिवार के पास पहले से शहरी क्षेत्र में पक्का मकान है, तो वह इस योजना के लिए पात्र नहीं होता। इसके बावजूद दंपति ने कथित रूप से गलत जानकारी देकर आवेदन किया और योजना का लाभ लिया।
3 लाख रुपए का मिला अनुदान
इंदौर में दंपति को 1BHK फ्लैट आवंटित हुआ, जिसमें योजना के तहत कुल 3 लाख रुपए का अनुदान मिला है। इसमें केंद्र सरकार द्वारा 1.5 लाख रुपए और राज्य सरकार द्वारा 1.5 लाख रुपए की राशि शामिल है। फ्लैट की वास्तविक कीमत लगभग 11.50 लाख रुपए थी, लेकिन अनुदान मिलने के बाद यह करीब 8.50 लाख रुपए में मिला है।
पलाश परिसर 1 की सातवीं मंजिल पर फ्लैट हुआ आवंटित
फ्लैट की रजिस्ट्री के अनुसार, इंदौर जिले के नगर परिषद राऊ क्षेत्र में स्थित पलाश परिसर-1 में दंपत्ति के नाम पर आवंटन हुआ है। ब्लॉक A-12 की सातवीं मंजिल पर स्थित फ्लैट नंबर 708, जिसका क्षेत्रफल लगभग 376.38 वर्गफीट है, दंपति को दिया गया है। कलेक्टर द्वारा अनुमोदित हितग्राहियों की सूची में दंपति का नाम क्रमांक 26 पर दर्ज है। उनके आवेदन के आधार पर आवंटन पत्र क्रमांक 1472/PMAY/पलाश-1 परिसर/2022-23 दिनांक 08 फरवरी 2023 को जारी हुआ है।
रजिस्ट्री में भी कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान
फ्लैट की रजिस्ट्री नगर पालिका निगम इंदौर के सहायक आयुक्त गोविंद सिंह कौशल द्वारा पुष्पा संतराम निषरेले (पति-पत्नी) के नाम पर की गई है। रजिस्ट्री दस्तावेज में स्पष्ट उल्लेख है कि आवासहीन "आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग" श्रेणी के पात्र होने के आधार पर आवास की समस्या को हल करने हेतु रियायती दरों पर स्वयं के आवास हेतु आवंटित किया गया है। साथ ही रजिस्ट्री में उल्लेख है कि यदि क्रेता द्वारा असत्य दस्तावेज या झूठी जानकारी देकर फ्लैट प्राप्त किया गया है, तो संबंधित पक्ष के खिलाफ वैधानिक न्यायालयीन कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, ऐसी स्थिति में होने वाले सभी खर्चों की जिम्मेदारी भी क्रेता की होगी।
नियमों की अनदेखी से उठे सवाल
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पति-पत्नी, अविवाहित बेटा और अविवाहित बेटी को एक ही परिवार माना जाता है। यदि इस परिवार के पास भारत के किसी भी शहरी क्षेत्र में पक्का मकान है, तो उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल सकता। लेकिन दंपति के पास नर्मदापुरम में शासकीय आई टी आई के पास स्थित निर्मल होम्स कॉलोनी में स्वयं का दो मंजिला पक्का मकान होने के बावजूद जानकारी छुपाकर योजना का लाभ लिया है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वास्तविक हितग्राहियों के साथ अन्याय
ऐसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि जहां एक ओर आम लोग वर्षों तक आवास योजना का लाभ पाने के लिए इंतजार करते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आसानी से लाभ उठा लेते हैं। इससे वास्तविक जरूरतमंदों के अधिकारों का हनन होता है और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
जांच के बाद हो सकती है कार्रवाई
इस मामले में प्रशासनिक जांच की पूरी संभावना है। साथ ही प्राथमिक जांच में तथ्य सही पाए जाते हैं, तो संबंधित दंपति के खिलाफ निम्न कानूनी कार्रवाई हो सकती है:
झूठे शपथ पत्र और गलत दस्तावेज देने पर दंपत्ति के विरुद्ध मामला दर्ज हो सकता है
3 लाख रुपए की ली गई अनुदान राशि की वसूली की जा सकती है
आवंटित फ्लैट को निरस्त किया जा सकता है

खबर पर प्रतिक्रिया /कमेन्ट करने के लिए लॉगइन करे Login Page
नए यूजर जुडने के लिए डिटेल्स सबमिट करे New User's Submit Details

