नर्मदापुरम । नर्मदापुरम जिले के अधिकतर शासकीय विभागों में सूचना के अधिकार अधिनियम का मजाक बनाकर रखा हुआ है। प्रत्येक जानकारी को व्यक्तिगत, परव्यक्ति का हवाला देकर आवेदकों को जानकारी प्रदान नही की जाती है जिसके बाद अपील की लंबी प्रक्रिया के चलते जानकारी मिलने में 2 से 3 वर्षों का समय लग जाता है। जिले में अधिकतर विभागों में लोक सूचना अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारी को आर टी आई शाखा का प्रभार देते है जिनको ना तो अधिनियम का ज्ञान है और ना ही विधिसंगत पत्राचार करने का ज्ञान। आरटीआई शाखा में पदस्थ कर्मचारी आवेदकों को आरटीआई में दी जाने वाली जानकारी रोकने के लिए नियम विरूद्ध पत्राचार तैयार करते है, जिनको शायद लोक सूचना अधिकारी बिना पढ़े ही हस्ताक्षर कर देते है। जिसका खामियाजा राज्य सूचना आयोग के पारित आदेश के चलते विभाग को भुगतना पड़ता है। ऐसा ही एक मामला नर्मदापुरम जिले की नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम कार्यालय का है, जहां मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग के पारित आदेश के चलते विभाग को 2000/- रूपए के जुर्माने का वहन करना पड़ा। लोक सूचना अधिकारी पर कार्यवाही ना होकर विभाग पर कार्यवाही होने के चलते सीएमओ नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम ने आरटीआई में जानकारी प्रदान नहीं करना ही सबसे उचित समझा है।
यह है मामला
मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग में प्रकरण क्रमांक ए-2544/2023 में पारित आदेश दिनांक 14/09/2023 में आवेदक को जानकारी प्रदान करने के आदेश लोक सूचना अधिकारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम को दिए गए थे। आयोग के पारित आदेश के बावजूद आवेदक को जानकारी नहीं दी गई जिसकी शिकायत आवेदक के द्वारा आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गई। मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने उक्त शिकायत पर कार्यवाही करते हुए अपने पारित आदेश दिनांक 08/04/2025 में उल्लेख किया है कि तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी नवनीत पाण्डेय ने आवेदक के आवेदन का विधि विरूद्ध तरीके से निराकरण किया गया जिससे आवेदक जानकारी प्राप्त करने से वंचित रहे, इस प्रकार आवेदक को जानकारी प्राप्त करने में अतिरिक्त समय, श्रम एवं धन की हानि हुई। आवेदक को नगर पालिका परिषद नर्मदापुरम में प्रस्तुत आरटीआई में जानकारी प्राप्त करनें ढाई वर्ष का समय लगा।
आवेदक को क्षतिपूर्ति राशि देने के आदेश दिए गए
आयोग द्वारा शिकायत की सुनवाई में आदेश पारित करते हुए अधिनियम की धारा 19(8)(बी) के अंतर्गत आवेदक को क्षतिपूर्ति राशि देने के आदेश दिए गए। आयोग ने संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग नर्मदापुरम संभाग को निर्देशित किया कि वह आदेश प्राप्ति के 15 दिवस के भीतर आवेदक को विभाग से क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करें। लेकिन आयोग के पारित आदेश से स्पष्ट किया है कि तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी द्वारा विधि विरूद्ध जानकारी देने में देरी की है तो विभाग से क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान विभाग से करना न्यायसंगत है। लोक सूचना अधिकारी की गलती का खामियाजा विभाग आखिर क्यों उठाएं ?
विधि विरूद्ध किए जा रहे पत्राचार, राशि जमा करने के बाद भी नहीं दी जा रही जानकारी
आरटीआई में आवेदकों के आवेदन पर विधि विरूद्ध तरीके से निराकरण किए जा रहे है। आवेदकों को निकाय में उपस्थित होने के पत्र लिखे जा रहे है, जबकि अधिनियम में उल्लेख है कि अगर आवेदक डाक से जानकारी प्राप्त करना चाहता है तो निर्धारित प्रक्रिया अपनाकर जानकारी प्राप्त कर सकता है। सीएमओ श्रीमती हेमेश्वरी पटले द्वारा आरटीआई से संबंधित आवेदक को पत्र प्रेषित किया गया जिसमें उन्होंने लेख किया है कि आपके द्वारा चाही गई जानकारी निकाय में उपलब्ध है अत: निकाय में उपस्थित होकर जानकारी प्राप्त करें। जिसमें ना तो सीएमओ के पत्र में पृष्ठों की संख्या का उल्लेख किया गया और ना ही चाही गई जानकारी की राशि का उल्लेख किया गया। जिस पर आवेदक द्वारा 100/- रूपए की राशि का चालान डाक खर्च सहित सीएमओ की ईमेल आईडी पर 11/08/2025 इसी प्रकार अन्य प्रकरण में 2 पृष्ठों की जानकारी हेतु 13/08/2025 को चालान भेजा गया। लेकिन 20 दिन बाद भी जानकारी नगर पालिका द्वारा जानकारी नहीं दी गई, जो कि आवेदक के मौलिक अधिकारों का हनन है। राशि जमा करने के बाद भी जानकारी नहीं देने से सीएमओं के द्वारा अधिनियम का पालन नहीं करना भी दर्शाता है।