
हरदा | जिले में लगातार गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए कलेक्टर ने बड़ा प्रशासनिक आदेश जारी किया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार हर्डा जिले में वर्तमान भू-जल स्तर लगभग 39.8 मीटर तक नीचे पहुंच गया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी गिरावट दर्शाता है। आने वाले गर्मी के मौसम में स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर द्वारा मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 (संशोधित 2022) के तहत महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 1 अप्रैल 2026 से 31 जुलाई 2026 तक पूरे हरदा जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है।
नए नलकूप खनन पर प्रतिबंध
जिले में नए निजी (प्राइवेट) नलकूप, ट्यूबवेल और हैंडपंप के खनन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। बिना सक्षम अनुमति के जल स्रोतों से सिंचाई एवं औद्योगिक उपयोग भी प्रतिबंधित रहेगा। किसी भी प्रकार का अवैध खनन या उपयोग करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों को दिए गए निर्देश
कलेक्टर ने जारी आदेश में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी और अनुमति प्रक्रिया की जिम्मेदारी दी है। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रशासन का उद्देश्य
प्रशासन का मुख्य उद्देश्य गर्मी के दौरान पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना और जल वितरण व्यवस्था को बनाए रखना है। बढ़ते तापमान और घटते जल स्तर को देखते हुए यह कदम आवश्यक बताया गया है।
क्यों लिया गया फैसला
भू-जल स्तर में गिरावट की संभावना और पेयजल एवं घरेलू उपयोग हेतु पेयजल को ध्यान में रखते हुए जनहित में कलेक्टर द्वारा निर्णय लिया गया है। जल स्रोतों के सूखने और भू जल स्तर के गिरने की संभावना के चलते प्रशासन ने समय रहते यह सख्त कदम उठाया है।

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