
नर्मदापुरम। न्यायालय में देर हैं पर अंधेर नहीं। जनमानस में यह भ्रम है कि चेक बाउंस होने पर आरोप झूठा होने पर भी राशि अदा करनी ही पड़ती हैं यह बात मिथ्या साबित हुई है। ऐसे ही एक मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी नर्मदापुरम द्वारा चेक बाउंस के एक मामले में अभियुक्त के विरुद्ध परिवाद प्रमाणित ना होने पर दोषमुक्त किया गया। अभियुक्त के अधिवक्ता योगेश पटेल, विजय सराठे व साथी अधिवक्ता ने बताया कि परिवादी विक्रम तिवारी ने छगनलाल यादव के विरुद्ध धारा 138 परक्राम्य अधिनियम का परिवाद न्यायालय के समक्ष पेश किया था। जिला सीहोर तहसील बुदनी के ग्राम बोहना के परिवादी ने अभियुक्त छगनलाल यादव निवासी ग्राम पाटनी तहसील माखननगर जिला नर्मदापुरम के विरुद्ध धारा 138 परक्राम्य अधिनियम के अंतर्गत न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया था। न्यायालय ने विधि एवं तथ्यात्मक विश्लेषण उपरांत अभियुक्त के विरुद्ध युक्ति युक्त संदेह से परे परिवादी परिवाद प्रमाणित करने में असफल रहा है। इन सब तथ्यों को देखते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी जिला नर्मदापुरम सुश्री के. शिवानी ने अभियुक्त छगनलाल यादव पिता हरि सिंह यादव को परक्राम्य लिखित अधिनियम 1881 की धारा 138 के आरोप में दोष मुक्त किया है। परिवादी ने परिवाद में बताया था कि उसने अभियुक्त को आपसी संबंधों के आधार पर दिनांक 21.2.2018 को 8 लाख 40 हजार रुपए अभियुक्त को दिए थे, जो उसने वापस नहीं किए। अभियुक्त का चेक बाउंस हो जाने पर उसने न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया था। जिस पर अभियुक्त न्यायालय ने दिनांक 19.2.2026 को दोष मुक्त किया है। इन्हीं विद्वान अधिवक्ताओं ने झूठे मामलों में फंसे व्यक्तियों की पैरवी कर दोषमुक्त कराकर न्याय दिलाया है। आज जनमानस में न्यायालय के प्रति न्याय में विश्वास बढ़ा है। मामले में अभियुक्त की बेहतर पैरवी कर जीत दिलाने पर अधिवक्ता योगेश पटेल, विजय सराठे, राकेश चावरे व साथी अधिवक्ता को अधिवक्ता संघ सचिव मनोज जराठे, प्रमोद गौर, आशीष बिजोरिया, मोहनलाल यादव, हनुमत ठाकुर, सौरभ तिवारी, मनीष शर्मा, मुनेंद्र मंडलोई, किशन मीणा, चंदन शाह, सचिन चौबे, राशिद खान, दीपक अग्रवाल, श्यामकांत बटे सहित अधिवक्ताओं ने बधाई दी।

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